अमेठी में राहुल का ‘बोल बम’ से स्वागत

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का सोमवार को उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी में अनूठे ढंग से स्वागत किया गया। भगवान शिव भक्त कांवड़ियों के कपड़े पहने सैकड़ों समर्थकों ने ‘बोल बम’ के नारों के साथ उनका स्वागत किया। कांग्रेस अध्यक्ष हाल ही में कैलास मानसरोवर की यात्रा से लौटे हैं। उनके समर्थकों ने फुरसतगंज में भगवान शिव का बड़ा होर्डिंग लगाया था और उसमें राहुल को शिवभक्त के रूप में प्रदर्शित किया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही मोबाइल की तस्वीरों में कांग्रेस अध्यक्ष के माथे पर चंदन का लेप लगा है और उस पर तिलक लगा हुआ है। कैलास की यात्रा के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे राहुल गांधी के स्वागत में समर्थकों द्वारा लगाये गये पोस्टरों में उन्हें शिवभक्त के रूप में दिखाया गया है। गांधी सुबह लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पहुंचे और सड़क मार्ग से अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी पहुंचे। गांधी दो दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे हैं। वह जिले में पार्टी की विभिन्न कमेटियों के साथ बैठक के साथ ही पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। अमेठी में आज उनका विशेष स्वागत कांवड़ियों ने किया। इसका आयोजन के कमांडर अभिलाष टॉमी का फाइल फोटो।
नयीतंबर (एजेंसी)
ऑस्ट्रेलिया के पास हिंद महासागर में 3 दिन से फंसे भारतीय नौसेना के अधिकारी अभिलाष टॉमी को सोमवार को बचा लिया गया। दुनिया की यात्रा पर अकेले निकले अभिलाष (39) की पाल वाली नौका एक शक्तिशाली तूफान में फंस गयी थी। वह गंभीर रूप से घायल हो गये थे। उन्हें बचाने के लिए कई देशों ने साझा अभियान चलाया। आखिरकार फ्रांस की मछली पकड़ने वाली नौका ओसिरिस ने उन्हें बचाया। बचाव अभियान में सफलता के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कमांडर ‘होश में हैं और ठीक हैं।’
कीर्ति चक्र से सम्मानित कमांडर अभिलाष 2013 में समुद्र के रास्ते पूरी दुनिया का चक्कर लगाने वाले पहले भारतीय बने थे। अब वह गोल्डन ग्लोब रेस में हिस्सा लेने गये थे। गोल्डन ग्लोब समुद्री मार्ग से पूरी दुनिया का चक्कर काटने वाली रेस है, जिसमें प्रतिभागी अपनी नाव पर अकेले होते हैं। प्रतिभागियों को बिना रुके 30 हजार समुद्री मील की दूरी तय कर पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करना होता है। अधिकारियों के अनुसार, टॉमी की नाव पर्थ से 1900 समुद्री मील की दूरी पर तूफान की वजह से दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी। करीब 15 मीटर ऊंची लहरों ने उनकी नाव ‘थोरिया’ को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। उनकी याट का मस्तूल यानी वह खंबा जिससे पाल बंधा रहता है, टूट गया था। जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे अभिलाष किसी तरह यह संदेश भेजने में कामयाब रहे कि उनकी कमर में गंभीर चोट आई है। उन्हें बचाने के अभियान में ‘ऑस्ट्रेलिया रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर’ सहित कई एजेंसियां ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विभाग और भारतीय नौसेना की सहायता कर रही थीं।
हिंद महासागर में तूफान के बाद फंसी उनकी नौका।
84 दिनों में तीसरे स्थान पर
एक जुलाई को प्रतियोगिता शुरू हुई थी। इसके बाद 84 दिनों में अभिलाष 10 हजार 500 समुद्री मील की दूरी तय कर चुके थे और रेस में तीसरे स्थान पर थे।
नक्शे-सितारों के सहारे रेस
इस रेस में प्रतियोगियों के पास पारंपरिक नौका होती है। सैटेलाइट फोन के अलावा संचार का कोई आधुनिक जरिये नहीं होता। सैटेलाइट फोन भी सिर्फ एमरजेंसी के लिए दिया जाता है। नाविक सिर्फ नक्शे, कम्पास और सितारों को देखकर दिशा तलाशते हुए बिना रुके अकेले रास्ता तय करते हैं।

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